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शिमला की टनल no.33 जहाँ घूमती है इस टनल को बनाने वाले इंजिनियर की आत्मा

 शिमला की टनल no.33 जहाँ घूमती है इस टनल को बनाने वाले इंजीनयर की आत्मा 




आज कई दिनों बाद गली में चाँद तो नहीं निकला लेकिन निकला है तो सिर्फ शिमला की tunnel no. 33 का एक रहस्य जो अभी तक अनसुलझा पड़ा है यह रहस्य ठीक उसी तरह अनसुलझा पड़ा है जैसे शोले के ठाकुर की बाजुए कटने का रहस्य।  हंसी मजाक बहुत हुआ अब करते है शिमला की टनल no.33 की बात। 





 शिमला की टनल no.33 जहाँ घूमती है इस टनल को बनाने वाले इंजीनयर की आत्मा





जैसे की हर किसी रहस्य के पीछे एक कहानी होती है वैसे ही इस शिमला के रहस्य के पीछे भी एक छोटी सी कहानी है जोकि डरावनी भी है और वास्तविक भी तो चलिए इस कहानी को शुरू करते है। 


ब्रिटिश काल में कर्नल ब्रोग नाम का एक रेलवे इंजीनयर था जिसे इस टनल को बनाने का काम ब्रिटिश सरकार ने दिया था और आगे चलकर इसी इंजीनयर के नाम पर इस टनल का नाम ब्रोग टनल पड़ा।  



ब्रोग को जब टनल बनाने का काम दिया गया तो ब्रोग एक दिन इस टनल के पहाड़ पर गए आवर दोनों  पहाड़ का निरीक्षण किया और उन्होंने दोनो छोरो पर निशान लगाए और अगले ही दिन दोनों तरफ से मजदूरों को टनल खोदने के काम पर लगा दिया। 


इस टनल को बनने में करीब एक से दो या इससे भी अधिक साल लग गए इस टनल को बनाते समय ब्रोग का ये अनुमान था की ये टनल दोनों तरफ जब खोदी जाएगी तो बीच में ये एक साथ मिल जाएगी और ये एक सीधी टनल बन जाएगी। 


लेकिन ऐसा हुआ नहीं जैसा ब्रोग ने सोचा था यहाँ उसके बिलकुल विपरीत हुआ और टनल सीधी तरह से नहीं बन पायी इस पर ब्रिटिश सरकार उसके नाराज हुई और ब्रोग पर 1 रुपए का जुरमाना लगा दिया और ब्रिटिश सरकर ने मजदूरों का वेतन देने से भी एंकर क्र दिया। 


ब्रिटिश सरकार के अनुसार अगर टनल का हम कोई उपयोग ही नहीं क्र सकते तो उसके पैसे देने का क्या फायदा।  ऐसा होने पर मजदूरों ने भी ब्रोग को बुरा भला कहा और जली कटी सुनाई ऐसा सब होने के बाद ब्रोग थोड़े तनाव में रहने लगे और उसके बाद बो एक सुबह अपने कुत्ते के साथ सैर पर गए। 


ठीक उसी टनल के सामने उन्होंने खुद को गोली मार दी कुछ घंटो तक उन्हें उस सुनसान जगह किसी ने नहीं देखा क्यूनि गॉवों वह से काफी दूर था फिर कुछ लोगों ने उसे वहां पर मरे पड़े हुए देखा बो खून से बिलकुल सना पड़ा था और उसको खून भी बिलकुल जम चूका था। 


इस घटना के बाद कई सालों तक इस टनल का काम शुरू नहीं किया गया लेकिन 1900 में फिर से इस टनल को दोवारा बनाने का काम शुरू किया गया जो की 1903 में जाकर खत्म हुआ और ये टनल आज के समय में दुनिया के सबसे सीधी टनल्स में से एक है। 




अब कहनी तो खत्म हो गई लेकिन अब हम बात करेंगे की ये टनल भूतिया है या नहीं।  वैसे अगर लोगो की मानी जाये तो ये टनल सचमे भूतिया है क्यूंकि जब इस टनल का काम दोबारा शुरू किया गया था तो यहाँ पर काम करने वाले मजदूरों को यहाँ पर आवाजे सुनाई देती थी जोकि बहुत अजीब होती थी और डरावनी भी होती थी। 




आज के समय में भी अगर हम वहाँ के स्थानीय लोगो की माने तो इस टनल टनल में उसी इंजीनयर का भूत है  लोग कहते है की एक बार इस टनल को टाला लगा दिया गया था लेकिन कुछ दिनों बाद टाला वहां टूटा पड़ा मिला था। 


स्थानीय लोग आज भी ये दावा करते है की इस टनल में अजीबो गरीब आवाजे आती रहती है और काई बार तो वहां पर ऐसी आवाजे आती है जैसे कोई वहां पर मर रहा हो। 


इसके अलावा कई लोग उस आत्मा को देखने तक का दवा करते है और कहते है की बो किसी अंग्रेज की आत्मा है जो खून से लतपत होती है और उसका मुँह बहुत ही जायेद डरावना है और कई बार उस इंजीनयर की आत्मा के रोने की आवाज आती है। 



शिमला की इस टनल में सचमे कोई आत्मा रहती है या नहीं ये तो पता नहीं क्यूंकि आज के ज़माने में ऐसी बातों पर विश्वास करना बेवकूफी कहलाएगी। 

लेकिन एक बात है जो इस बात का प्रमाण देती है की उस टनल में आत्मा है क्यूंकि इस बात का आजतक किसी को भी पता नहीं है की उस इंजिनियर ने आतमहतया की थी या उसे मारा गया था उस घटना का एकमात्र गवाह उसका कुत्ता था जोकि उसकी मोत के कुछ दिनों बाद ही मर गया था। 


लेकिन खैर जो भी हो आपको क्या लगता है की शिमला की टनल no.33 में सचमे आत्मा है या नहीं कमेंट में जरूर बताये और ये भी बताएं की आपको हमारी इस तरह की रहस्मयी पोस्ट कैसी लगती अगर अच्छी लगती है तो कमेंट जरूर करे और हमे बताये की अगली पोस्ट किस भुतिआ जगह या महल पर ले जाये।